रविवार, 12 अक्तूबर 2008

यादें.............

यादें क्या है
एक अनन्त प्रवाह
जो बहता जाए
नित कल-कल
छल-छल
जैसे कोई सरिता |

यादें क्या हैं
मन का
वो कारवां
जो चलता ही जाए
प्रतिपल अविरल

कभी सताएं
कभी हंसाएं
कभी कुछ गुनगुनाए
नित नवीन से
रंग दिखा कर
कुछ अजीब से
रंग दिखा कर
गुम हो जायें

आयें मन में
गीत सुनाएं
खूब हंसाएं
अगले ही पल
फ़िर कुछ मन को
याद दिलाएं
फ़िर नयनो को
यूँ भर जायें
गुम हो जायें

यादें ना हो
जीवन क्या हो
सब भूला
कल को भूला
फ़िर कुछ आगे
क्या कर पायेगा


--------------- निपुण पाण्डेय "अपूर्ण"

1 टिप्पणियाँ:

दीपाली शनिवार, 1 नवंबर 2008 को 8:20:00 pm IST  

यादो का सचित्र वर्णन ...
पुरी कविता एक लय में है

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