गुरुवार, 23 अप्रैल 2009

नयी सुबह....

नयी सुबह
किरणों में ओज
अनोखा ,
पलकों में दस्तक
नए नवेले ख्वाबो की,
कदम
लबालब जोश से
दौड़ जाने को बेताब,
पिंजडे से छूटा पंछी
निकल पड़ा हो जैसे
छू लेने बादलो को |

आशाये,
बसंती कोपलों जैसी
लिपटी हुई
नए चोगे में,
थिरक रही हैं
उंगली ले हाथो में
इन ख्वाबो की

मन ये पागल
खडा किनारे
देख रहा है ,
कर बैठेगा
कुछ अगले ही पल ,

बरसों से था
इंतजार में
इसी सुबह के,
शायद पा ले
अब कुछ
अगले ही पल
नई सुबह में ....

-------------- निपुण पाण्डेय "अपूर्ण "

4 टिप्पणियाँ:

srikala गुरुवार, 23 अप्रैल 2009 को 10:57:00 pm IST  
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Amol शुक्रवार, 24 अप्रैल 2009 को 10:02:00 am IST  

क्या बात है मेरे दोस्त ... पहली ही बाल पे छक्का मर दिया तुमने .. मस्त गझल लिखी है ..

कविता by निपुण पाण्डेय is licensed under a Creative Commons Attribution-Noncommercial-No Derivative Works 2.5 India License. Based on a work at www.nipunpandey.com. Permissions beyond the scope of this license may be available at www.nipunpandey.com.

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