मंगलवार, 27 सितंबर 2011

आर या पार

कामनाओं का संसार
भ्रांतियों से सरोबार 
मरीचिका में उदित
अस्तांचल अन्धकार

दिशाओं से गुंजित 
लोलुपता की झंकार
मानवता की मृत्यु
स्वार्थ की पैदावार

यहीं लेखा यहीं जोखा
'पुनर्जन्म थ्योरी' बेकार 
आज नही तो कल, यहीं 
फैसला , आर या पार |

-------निपुण पाण्डेय "अपूर्ण "

1 टिप्पणियाँ:

Gunjan मंगलवार, 27 सितंबर 2011 को 11:17:00 pm IST  

sahi kaha... aaj nahin to kal..yahin faisla...aar ya paar.... nice written

कविता by निपुण पाण्डेय is licensed under a Creative Commons Attribution-Noncommercial-No Derivative Works 2.5 India License. Based on a work at www.nipunpandey.com. Permissions beyond the scope of this license may be available at www.nipunpandey.com.

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