शुक्रवार, 28 मई 2021
गुरुवार, 17 जनवरी 2019
Learning from Nature
Tried to make few rhyming lines for my
Son Chirayu to recite in front of his class :
Standing straight n tall
The trees big and green,
Give shelter to the needy
And keep air clean
Little flower in my window
Shows me the way,
I smile all the time
And make your day
Birds chirping in the morning
Wake me up everyday
The melody in my ears
Takes all the blues away |
Lovely breeze from the sea
Where the naughty waves play
Hugs me every morning and
Fills my heart with joy !
I learn from the waves
Rising high n going down
To stand, smile n move
when you fall down !
सोमवार, 20 नवंबर 2017
आवारगी

ज़माने के रंज-ओ-ग़म से तआ'रुफ़ कराएं चलो
शहर की फ़ज़ाओं में तुम्हें तरबतर कराएं चलो
मुख़्तलिफ़ ज़बानों की मधुर सरगमें सुनाएं चलो
बच्चे ! तुम्हें आवारगी के सबक़ सिखाएं चलो...
बुधवार, 28 अगस्त 2013
खिलाफत चीख कर करता नहीं हूँ...
पिछले कुछ दिनों से ग़ज़ल के तकनीकी पहलुओं पर ध्यान दे कर ग़ज़ल लेखन का प्रयास कर रहा हूँ । सौभाग्यवश आदरणीय नीरज जी का मार्गदर्शन मिल रहा है । मैं तो शब्दों को जोड़ तोड़ कर बहर में ग़ज़ल कहने का प्रयास बस कर पाया था परन्तु नीरज जी ने ग़ज़ल का रूप दे दिया :
खौफ से बाहर कभी रहता नहीं हूँ
खोल घर की खिड़कियाँ सोता नहीं हूँ
बात सच मिरची सरीखी बोलकर मैं
महफ़िलों में देर तक टिकता नहीं हूँ
लाख अपना हाथ देते लोग मुझको
चाह कर भी अब यकीं करता नहीं हूँ
दौर कितना भी भले आ जाय मुश्किल
सामना करने से मैं डरता नहीं हूँ
चाँद की हसरत भले है दिल में मेरे
चाँद की हसरत भले है दिल में मेरे
छोड़ कर अपनी जमीं, उड़ता नहीं हूँ
मैं खिलाफत चीख कर करता नहीं हूँ
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